अरविन्द केजरीवाल को जेल क्युँ ?
आज देशमें १६ वे लोकसभा इलेक्शन ख़त्म होनेकेबाद लोग आपने कामकाजमें फिरसे व्यस्त हो रहे हे और देश के भावी वडाप्रधान सपथ लेने वाले है. आज इस देशकी जनताने किसी सांसद और किसी पार्टी को चुननाने के बदले एक व्यक्ति के जिसने आपने आप को सार्थक करनेमे एड़ीचोटिका जोर लगाया, पैसो की नदिया बहाई, एक से एक बड़े भ्रस्टाचारी और दागी ओ को साथमे जोड़ा और जनताको अपने सार्थक होनेका प्रमाण देकर बड़े बड़े सपने दिखाये। जनताने उस व्यक्ति को चुनके अपनी आशाओ और आकांगशाओ को बुलंद किया है तब आशा करतेहे की ये व्यक्ति हमें नयी उचाईयो पे ले जाइ.
इस के साथ साथ एक और व्यक्ति जो इस देश में चलरहे उलटी धारा को सीधी करनेकी बात करताहै। इस देश में जहा सही मायनेमे लोकतंत्र नहीं है। इस लोकतंत्रेमे देश के लोगोका राज नहीं है और हर डगर पर अन्याय होता हे उसे ठीक करनेकी बात करता है हो श्री अरविन्द केजरीवाल आज इस देश के सबसेबड़ी जेल में है. आज देश की जनताको ऐ भी समजना चाहिए की अरविन्द जेल में क्यों है ?
इस देश में जब कानून जहा चाहे कमजोर और जहा चाहे मजबूत बनाया जा सकता है उस बात को आज अरविन्द के जेल जाने ने से साफ हो जाती है. कानून के रखवाले कानून किस तरीकेसे लोगो को फ़सानेमे इस्तेमाल करतेहै ऐ बात सब जानते है. जब हमारे न्यायतंत्र की कमजोरिया किसिको ठीक नहीं करनी तब अरविन्द को एक मौका मिला और वोह इस मोके को जाने दे और आराम का रास्ता चुनके इस गन्दी व्यवस्थासे समजोता करले उतना स्वार्थी नही. हमें इस द्घटनाको बराबर समजना चाहिए। और देश की जनताको जगाना चाहिए।
अरविन्द केजरीवालजी जो देश के एक जानेमाने व्यक्ति है और उसने देश में चलरहे भ्रस्टाचारके खिलाफ इक बड़ी मुहीम चेडी है. जिसका योगदान देश को सूचनाका अधिकार देनेमे रहा और इस देशकी राजधानी के ४९ दिन के मुख्यमंत्री बनके इस देश की गंदकी साफ करनेकी कोसिस की है. उस व्यक्ति ने भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरीजी को चोर और भ्रस्टाचारी कहा तब नितिन गडकरी को ऐसा लगाके अरविन्दजी के आरोपोसे उसका मान काम हुवा है और उनको बड़ा खामयाजा भुगतानपाड़ा है. इस लिए मान हानिका दवा नितिन गडकरी की तरफसे पेस किया गया.अब जब राजनीतिमें एक दूसरेपे आरोप प्रत्यारोप करके आपने आप को साफसुफरा साबित करने की होड़ लगी रहेति है तब एह मुकदमा हमारी आँखे खोलनेको मजबूर करता है.
अरविन्दजी ने गडकरीजी को चोर और भ्रस्टाचारी क्यों कहा ये बात गडकरीजी के संकास्पद कंपनी के सबंधो और काफी सारी और भी बजह है जो हम सब जानते है. मगर क्या वाकई गडकरीजी चोर और भ्रस्टाचारी है इस लिए अरविंदजी ने उसे ऐसा कहा ? और ऐसा कहनेकी बजह से क्या वाकई गडकरीजी को कोई खामयाजा भुगतना पड़ा है ? ऐ फैसला अदालत करेगी मगर तब जब अदालत दोनों पक्ष की दलीले सुनेगी और फैसला लेगी। उसका मतलब है की दोनों पक्षो को आपने आप को सही साबित करना पड़ेगा और इस प्रकियामे तो काफी समय जायेगा। मगर यहाँ जब अरविन्द ने गलत किया है ऐसा कुछ साबित नहीं हुआ है फिर भी अरविन्द को जमानत क्यों लेनी चाहिए ?
जब कोई अपराधी पर गंभीर गुना करनेका मुक़दमा चलता हो और वोह अदालत में हर समय उपस्थित न होता हो और देश छोड़के चलेजानेकी संका हो तब अदालत आरोपिसे जमानत राशि भरके गरंटी मांग सकती है. जब यह मुक़दमा उतना गंभीर नहीं और कोई भी पक्ष में जा सकता है तब अदालत अरविन्दजी पे भरोसा क्यों नहीं करसकती ? बात सिर्फ १००००/- के जमानत शुल्क की नहीं है बात इस कानून को अरजिंदजी के खिलाफ जानबूजकर इस्तेमाल किये जानेकी है. जहा देश में लाखो मुकदमेमे आरोपी अदालतमे उपस्थित नहीं रहते और पैसो के दम पर न्याय खरीदते है वही, लाखो लोग ऐसेभी है जो बेगुनाह है और अभीतक गुना तय नहीं हुआहै फिरभी जेल काट रहेहै। आज जब अरविन्दजी इस व्यस्था के सामने आवाज उठता है योर जमानत शुल्क नहीं भरकर जेल जाते है तो कुछ बुद्धि जीवियो और मीडिया उसको नौटंकी बताकर देश को गुमराह कर रहाहै।
कुछ माध्यम बतारहे है की अरविन्द नौटंकी कर रहे हे और योगेन्द्र यादवजी का हवाला दे रहे है. हमें ऐ भी समजना चाहिए की योगेन्द्र यादवजीने दिए पर्सनल बांड और अरविंदजी से मांगे गए जमानत बांड में क्या फर्क है. यादवजी ने पर्सनल बांड दिए है और उसको अंडरटेकिंग कहतेहै जो अरविंदजी भी देनेकेलिये तैयार थे मगर अदालतने उसे स्वीकार नहीं किया।
अरविन्दजी के साथ अदालत का यह रवैया बोहुत कुछ साबित करताहै। इस देश में जो लोग इस देश की कमजोरिका फ़ायदा उठाकर अपनी रोटिया शेक रहेहै और पैसा बनारहे है उनके लिए अरविंदजी एक बड़े खतरेकी घंटी है. ऐसे लोग अरविंदजी को कभी कामयाब देखना नहीं चाहेंगे। इस लिए आज सारी मीडिया और बुद्धिजीवी अरविन्दजी की किरकिरी कर रहे है. अरविंदजीके साथी इस मसलेका हल ऊपरी अदालतमे जेक खोजेंगे और आशा रखतेहै की न्याय मिलेगा और गडकरीजीको भी अपने भ्रस्टाचारी नहीं होनेका साबुत देना पड़ेगा मगर तबतक अरविंदजीकी पीड़ा हमें समाजनी पड़ेगी।
देश की जनता को यह समजना चाहिए और अरविन्दजी के इस कदम को सराहना चाहिए. ये देस को अरविंदजी जैसे लोगोकी सख्त जरुरत है वार्ना आगे से लोगोकी आवाज कभी भी सुनी नहीं जाएगी। एक चुनाव जितना और हारना व्यक्ति के अचे और बुरे होनेका प्रमाण नहीं हो सकता। पिछले चुनाव में बहुतसारे भ्रस्टाचारी और दागिओ भी चुनेगए है. उसका मतलब ये नहीं के ये लोग अच्छे है और हरनेवाले बुरे थे. देश की जनताको परिपक्व होना पड़ेगा तभी सही मायनेमे हम आगे बढ़ सक्तेहै.
जय हिन्द…
मनोज सोरठिया
इक आम आदमी
सूरत ,गुजरात।
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